हैं झकझोर जातीं मुझको बातें जो न आतीं अक्सर मन में मेरे, ज़हन में मेरे आतीं तब ही जब मैं देखूँ कि गरीब, हाथ है पसारे लाचार, भूख के हैं मारे युवा जो हैं भरे यहाँ पे वो सिर्फ रोजगा...
है खिल गया जो पुष्प उसे तोड़ना निषेध है क्या निषेध भी वो जीवन जिसमें न कोई क्लेश है...?? है क्लेश वह या है कमी कमी कभी जो मैंने की परिश्रम के तौल माप में प्रयास में या आस में या फिर औ...