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Showing posts from February, 2018

आज फ़िर

कि आज फ़िर तुम्हारा ज़िक्र हुआ थे आये कुछ शागिर्द अपने सवालात लेकर उलझन थी कुछ उनकी उनके हालात को लेकर हम भी ऐ ख़ुदा उन्हें तालीम देने लगे लगा उन्हें कुछ ऐसा की मानो उनकी हर एक ...