कर्म कर
सपने आँख में लिए
उम्मीद के जले दिये
शून्य भाग्य को तू मानकर
चल बढ़ा कदम
तू कर्म कर..
जो लक्ष्य मन में तेरा है
होना अब वहीँ सवेरा है
नींद और थकान
तू भूलकर
चल बढ़ा कदम
तू कर्म कर...
संकल्प को तेरे दृढ़ बना
स्वयं की एक धुन बना
कि
एक संघर्ष ही तेरा साथी
ये सोचकर
चल बढ़ा कदम
तू कर्म कर...
ये प्रयास की ही बात है
सही समय तो सिर्फ आज है
डटा रह बस तू यूँ ही
जो तेरी निष्ठा तेरे साथ है
आज नहीं तो कल
मिलेगा लक्ष्य तुझको भी
ये सोचकर
चल बढ़ा कदम
तू कर्म कर...
कैसी होनी तेरी है विजय
ये न तेरा हो विषय
परिश्रम में न कोई हो कमी
हो अच्छा तेरा स्वास्थ्य भी
बना इसे विषय
विचार कर
चल बढ़ा कदम
तू कर्म कर...!
उम्मीद के जले दिये
शून्य भाग्य को तू मानकर
चल बढ़ा कदम
तू कर्म कर..
जो लक्ष्य मन में तेरा है
होना अब वहीँ सवेरा है
नींद और थकान
तू भूलकर
चल बढ़ा कदम
तू कर्म कर...
संकल्प को तेरे दृढ़ बना
स्वयं की एक धुन बना
कि
एक संघर्ष ही तेरा साथी
ये सोचकर
चल बढ़ा कदम
तू कर्म कर...
ये प्रयास की ही बात है
सही समय तो सिर्फ आज है
डटा रह बस तू यूँ ही
जो तेरी निष्ठा तेरे साथ है
आज नहीं तो कल
मिलेगा लक्ष्य तुझको भी
ये सोचकर
चल बढ़ा कदम
तू कर्म कर...
कैसी होनी तेरी है विजय
ये न तेरा हो विषय
परिश्रम में न कोई हो कमी
हो अच्छा तेरा स्वास्थ्य भी
बना इसे विषय
विचार कर
चल बढ़ा कदम
तू कर्म कर...!
तू कर्म कर,तू कर्म कर ।
ReplyDeleteआज नही तो कल,आएगा वो सवेरा
जो आज लगे दूर तुझसे,होगा कल को तेरा
तू कर्म कर,तू कर्म कर ।।
तू कर्म कर,तू कर्म कर ।।
भूल ना तू खुद को,भूल ना तू सबको
आंख नीचीं होगी उनकी,जो हँसे थे तुझ पर
बस कर्म कर
तू कर्म कर।।